डॉ. पारीक होम्योपैथिक सेंटर में 19 से 23 फरवरी, 2025 तक चलने वाले उन्नत शिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित


 आगरा। डॉ. पारीक होम्योपैथिक सेंटर में 19 से 23 फरवरी, 2025 तक चलने वाले उन्नत शिक्षण कार्यक्रम का आज, 23 फरवरी, 2025 को समापन समारोह आयोजित किया गया।कार्यशाला में 10 देशों -  जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, रूस, कजाकिस्तान और आर्मेनिया आदि के 45 से अधिक चिकित्सकों ने होम्योपैथी में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया।डॉ. पारीक ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथिक उपचार का प्रचार करना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सेंटर में 60,000 से अधिक रोगियों ने व्यक्तिगत रूप से होम्योपैथिक उपचार प्राप्त किया और 6000 से अधिक रोगियों ने ऑनलाइन मोड के माध्यम से परामर्श प्राप्त किया। रोगियों के लिए दवाओं के प्रेषण और उनकी रिपोर्ट के अद्यतन की सुविधा के लिए एक नई और अद्यतन प्रणाली और वेब पोर्टल भी लागू किया गया है।सेंटर में पूरे वर्ष शोध गतिविधियाँ भी होती रहीं - विभिन्न रोगों जैसे- मलाशय अल्सर, गुदा फिस्टुला, वोकल कॉर्ड पॉलीप्स आदि पर लेख प्रकाशित किए गए। डॉ. पारीक होम्योपैथिक सेंटर के क्लिनिकल जर्नल का नया संस्करण सितंबर 2024 में प्रकाशित हुआ, जिसमें इस वर्ष के कुछ शोध लेख भी शामिल हैं। इस अवसर पर डॉ. मरीना बाशको रूसी होम्योपैथिक एसोसिएशन की प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक शिक्षण के वैज्ञानिक आधार और आगरा में लाइव कार्यशाला के दौरान उनके द्वारा देखे गए विभिन्न रोगियों के विभिन्न मामलों को देखकर वह बहुत प्रभावित हुईं। यह उनके लिए बहुत ज्ञानवर्धक था और उन्होंने वादा किया कि वे अपने ज्ञान को और समृद्ध करने के लिए हर साल आते रहेंगी।डॉ. मरियम आर्मेनिया में होम्योपैथी की संस्थापक हैं। उन्होंने वहांँ होम्योपैथी की शुरुआत की और दो दशकों से इसे विकसित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा-दादी उनसे कहते थे कि डॉक्टर भगवान की तरह होते हैं और 20 साल पहले डॉ. आर.एस. पारीक से मिलकर उन्हें पता चला कि वास्तव में डॉक्टर भगवान की तरह ही होते हैं। जबकि मेडिकल यूनिवर्सिटी में अपनी पूरी मेडिकल शिक्षा के दौरान उन्होंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। कहानी सुनाते समय वह बहुत भावुक हो गईं। डॉ. आदित्य पारीक ने कहा कि ऐसे इंटरैक्टिव सेमिनारों के माध्यम से हम न केवल होम्योपैथिक शिक्षण का प्रसार करते हैं, बल्कि अपने स्वयं के अनुभवों को भी समृद्ध करते हैं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नितिका पारीक ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ते हुए कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर डॉ. सुशील गुप्ता, नरेश जैन, शोभा जैन, गोपाल गुप्ता, पूरन डाबर, मधु डाबर, डबी सरीन व बेला सरीन की सराहनीय उपस्थिति रही।

Jarnalist, Satish Mishra, Agra

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