प्राथमिक स्तर पर क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षण का माध्यम बनाने के सीबीएसई के कदम को अप्सा द्वारा खूब सराहा गया


 CBSE  ने सत्र 2025-26 में प्री प्राइमरी (नर्सरी) से कक्षा पाँच तक शिक्षण तथा निर्देश के माध्यम के रूप में मातृभाषा के प्रयोग को अनिवार्य कर दिया है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जितनी कुशलता से हम अपनी मातृभाषा में अपने भावों को अभिव्यक्त कर पाते हैं, अंग्रेजी में धाराप्रवाह बोलने के बाद भी कभी-कभी हम इसके द्वारा अपने भावों को पूरी तरह दूसरे तक नहीं पहुँचा पाते।इसी को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने प्रारंभिक शिक्षा में किसी भी विषय को आत्मसात कर सकने और अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से बच्चों तक पहुँचाने के लिए मातृभाषा को मुख्य रूप से प्रयोग किए जाने को अनिवार्य बनाया है।छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई के इस कदम का स्वागत करते हुए अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के घरों पर मातृभाषा में ही संवाद होता है। चाहकर भी कुछ माता-पिता अपने बच्चों को उनके शिक्षण में सहयोग नहीं कर पाते हैं। हिंदी भाषा में स्पष्टीकरण से इस कड़ी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए शिक्षकों के लिए कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जिससे इस प्रयास को वास्तविकता के धरातल पर लाभदायक बनाया जा सके। सीबीएसई के निर्देश के अनुसार सभी विद्यालयों में कमेटी का गठन किया जा रहा है, जो इस प्रयास को वास्तविक रूप में क्रियान्वित करने और प्रगति पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।इसे सफल बनाने में एन सी आर टी की  पुस्तकें सहायक होंगी। नर्सरी से यूकेजी तक प्ले वे पद्धति से एन सी आर टी के द्वारा उपलब्ध कराई गई  हिंदी भाषा में जादू का पिटारा का उपयोग करते हुए छात्रों को शिक्षा प्रदान की जाएगी।कक्षा एक एवं दो में NCERT द्वारा प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों द्वारा मीडियम ऑफ़ इंस्ट्रक्शन के रूप में हिंदी का उपयोग करते हुए बच्चों को पढ़ाया जाएगा ताकि उनमें विषय को  पूर्ण रूप से समझने की क्षमता का विकास हो सके। द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी को साथ-साथ पढ़ाया जाएगा, जिससे छात्र सामाजिक परिवेश में किसी से पीछे न रहें। इसके द्वारा छात्रों को प्रत्येक विषय के मूल सिद्धांतों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सकेगा। खासकर भाषा (हिंदी और इंग्लिश) और गणित (लॉजिक) के प्रारंभिक ज्ञान में विशेष वृद्धि की जा सकेगी।यह प्री प्राइमरी से कक्षा दो तक के लिए जुलाई माह से प्रयोग में लाया जाना अनिवार्य है, जबकि कक्षा तीन से पाँच तक वैकल्पिक है। इसमें भी स्पष्टीकरण एवं निर्देश के माध्यम के रूप में हिंदी को प्रोत्साहित किया जाएगा।



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