गणेश रामनगर सरस्वती शिशु मंदिर बल्केश्वर के प्रांगण में को कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया*

आगरा। गणेश रामनगर सरस्वती शिशु मंदिर बल्केश्वर के प्रांगण में को कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया ।जिसमें हमारे विद्यालय के छोटे-छोटे कांवड़ियां ने बहुत ही उत्साह से भाग लिया। सावन जैसे भोले के भक्तों का महीना सावन में ही कावड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। क्या आपको पता है पहले कावड़ भोले बाबा पर किसने चढ़ाई थी। कावड़ यात्रा जैसे भोले या कावड़िया कहे जाने वाले शिव भक्तों को कहते हैं।भोले बाबा पर सर्वप्रथम कावड़ देवी देवताओं ने चढ़ाई थी। यह यात्रा विशेष रूप से सावन के महीने में आयोजित की जाती है। भक्त गंगा नदी से पवित्र जल लाकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं , इस कावड़ यात्रा में हमारे विद्यालय के 120 कांवड़ियों  ने भाग लिया।विद्यालय के नन्हे मुन्ने कांवरियां ( कक्षा - यूकेजी ) द्वारा आज भव्य कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया । कांवड़ियों ने भोलेनाथ की भक्ति में डूब कर मंत्रोच्चारण , भजन व  बम बम की ध्वनि से रंग-बिरंगे  सजे- धजे कावड़ के साथ यात्रा निकाली ,  जिससे संपूर्ण वातावरण भक्ति में डूब  गया। इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कोषाध्यक्ष आदरणीय दुर्गेश दीदी, श्वेता दीदी विद्यालय की प्रधानाचार्या जी उपस्थित रहे और उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें शिव भक्ति के महत्व को सरल शब्दों में समझाया। बच्चों को कावड़ यात्रा के पौराणिक , धार्मिक , सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को भी समझाया गया -

 *पौराणिक महत्व*

 पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान विष (हलाहल ) निकाला था। जिसे भगवान शिव ने ग्रहण किया था इसी विष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए देवताओं ने गंगाजल लाकर भगवान शिव पर अर्पित किया था। 

*धार्मिक महत्व* 

कावड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है , शास्त्रों में कहा गया है की कावड़ यात्रा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्रदान करती है। 

*वैज्ञानिक पहलू* 

कावड़ यात्रा के दौरान नंगे पैर लंबी दूरी तक पैदल चलते हैं जिसे रिफ्लेक्सोलॉजी के माध्यम से पैरों के तलवों में स्थित ऊर्जा केंद्रो को उत्तेजित किया जाता है जिससे स्वास्थ्य लाभ होता है वैज्ञानिक पहलू से कावड़ यात्रा करने के अन्य स्वास्थ्य पहलू भी हैं। कावड़ यात्रा में बच्चों के माता-पिता भी सम्मिलित रहे और हर्ष के साथ इस कावड़ यात्रा का समापन हुआ।

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