रामकथा से होता है मन का शुद्धिकरण : व्यास पं. गरिमा किशोरी जी





 आगरा।खेमेश्वर नाथ मंदिर, तोता का ताल पर चल रही श्रीरामकथा के दूसरे दिन व्यास पं. गरिमा किशोरी जी ने कहा कि रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि कर्म, त्याग और भक्ति की त्रिवेणी है।श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने से समाज में शांति, सद्भाव और कल्याण स्थापित हो सकता है।व्यास जी ने कहा कि रामकथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है, संशय दूर होते हैं और शांति व मुक्ति की प्राप्ति होती है। कथा अहंकार त्यागकर आदर्श और सत्यनिष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रभु की कृपा से ही कथा संभव हो पाती है और जहां भक्त निवास करते हैं, वहां रामकथा का आयोजन सफल होता है।उन्होंने यह भी बताया कि प्रभु ने मानव शरीर दिया है, लेकिन पुरुषार्थ करना ही मानव का धर्म है। बिना परिश्रम के सफलता असंभव है। रामकथा से जीवों की व्यथा दूर होती है और मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्ति के आगे भगवान भी अधीन हो जाते हैं और भक्त जिस रूप में उन्हें याद करता है, उसी रूप में वह दर्शन देते हैं।इस अवसर पर परीक्षत अजय सुनीता माहौर व पंडित विद्यासागर तिवारी,नवल पंडित ,समाज सेवी श्याम भोजवानी, पार्षद शरद चौहान, विक्रांत कुशवाह सचिन यादव, गुरुविंदर सिंह, बंसी लाल, शांकरलाल, मनोज सिकरवार, रवि, वीरू, मीनू सेन, मुकेश यादव, दिनेश, डब्लू राजपूत, समत लाल, राजू यादव, महिंदर, फतेहचंद यादव, पंकज राजपूत,  अलोक पंडित, मनोज तीर्थनी  आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण का लाभ उठाया।

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