श्रीमद् रामकथा का पाँचवाँ दिवस भक्तिभाव और उल्लास से परिपूर्ण रहा। कथा व्यास पं. गरिमा किशोरी जी ने श्रीराम विवाह प्रसंग का ऐसा अद्भुत वर्णन किया
आगरा।तोता का ताल स्थित खेमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद् रामकथा का पाँचवाँ दिवस भक्तिभाव और उल्लास से परिपूर्ण रहा। कथा व्यास पं. गरिमा किशोरी जी ने श्रीराम विवाह प्रसंग का ऐसा अद्भुत वर्णन किया कि सम्पूर्ण पंडाल भावविभोर हो उठा।उन्होंने कहा कि जनकपुरी में धनुष यज्ञ के अवसर पर जब प्रभु श्रीराम ने शिवधनुष को सहजता से उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई, तो वह खंडित हो गया। उसी क्षण जनकनंदिनी माता सीता ने स्वयंवर के नियम अनुसार प्रभु श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी। मिथिला नगरी आनंद से गूंज उठी, आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी और देवगण “जय श्रीराम” का उद्घोष करने लगे।कथा व्यास पं. गरिमा किशोरी जी ने श्रद्धालुओं से कहा कि जब भक्त का भाव सच्चा होता है तो भगवान अवश्य प्रकट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उन्होंने कहा—“प्रभु ने हम सबको इतना कुछ दिया है, जिसका ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। इसलिए जीवन में आने वाले सुख-दुःख को प्रसाद समझकर स्वीकार करें और निरंतर प्रभु का स्मरण करते रहें।”इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे। वातावरण में राम नाम की ध्वनि और भक्ति रस की गंगा बह निकली। भक्तजन भावविभोर होकर जयघोष करते रहे।कथा का यह दिव्य आयोजन केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन में आस्था और संस्कार जगाने का पर्व है। आयोजकों ने सभी नगरवासियों से आह्वान किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर रामकथा रूपी अमृत का श्रवण करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।मुख्य रूप से सोनिया माहौर,पूनम छतानी,चाँदनी भोजवानी, कीर्ति सेन, प्रीती, ओमबती राजपूत, सीमा, पदमा, सोनिया, नूतन, सरोज, रेनू राजपूत, भगवती देवी, मधु, रति माहौर आदि महिलाएं पुरुष उपस्थित रहे।

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