गुरद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर–विभव नगर, आगरा में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर भव्य कीर्तन दरबार संपन्न
गुरद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर–विभव नगर, आगरा में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर भव्य कीर्तन दरबार संपन्नजगत गुरु धन-धन श्री गुरु नानक देव जी के पावन प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरद्वारा दशमेश दरबार में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य कीर्तन दरबार सजाया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध रागी जत्था भाई कमलजीत सिंह जी (बटाला, पंजाब वालो) ने विशेष रूप से शिरकत की और संगतों के दर्शन किए। दिनांक 7 नवम्बर को आयोजित विशेष शाम के दीवान में भाई साहिब ने हाजिरी भरकर अमृतमयी गुरबाणी कीर्तन की रसधारा प्रवाहित की, जिससे संगत पूर्णतः निहाल हो उठी।भव्य सजे धन धन गुरु ग्रन्थ साहिब जी के दीवान संगतो ने परिवार सहित माथा टेक गुरुघर की खुशियाँ ली,भाई साहिब का जत्था ( बटाला पंजाब) का रहने वाला है—वही ऐतिहासिक पवित्र स्थल जहाँ श्री गुरु नानक देव जी बारात लेकर माता सुलक्षणी जी को विवाह हेतु आए थे। इस स्मृति में वहाँ आज भी गुरुद्वारा श्री कांध साहिब और गुरुद्वारा श्री डेहरा साहिब विद्यमान हैं।कीर्तन दरबार के दौरान रागी जथों द्वारा गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व संबंधी कई पवित्र शब्द अत्यंत भावपूर्ण शैली में गायन किए गए, जिनमें मुख्य रूप से—सतिगुर नानक प्रगटया, मिट्टी धुंध जग चानण होआ”
“जीती नौखंडि मेदनी, सतिनाम दा चक्कर फिराया”
का गायन बेहद प्रभावशाली रहा।
इसके अतिरिक्त गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व से संबंधित पवित्र शब्द—
“हरि प्रभ काज रचाया, गुरमुख वियाहण आया”
ने समूची संगत को भाव-विभोर कर दिया।
हजूरी रागी भाई हरजिंदर सिंह जी ने गुरु नानक देव जी की उपमा और दिव्य जीवन-चरित का सुंदर वर्णन कथा के माध्यम से किया।
कार्यक्रम का समापन ज्ञानी जी द्वारा अरदास और हुकमनामा के उपरांत हुआ। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया।
सेवा में मुख्य रूप से शामिल:
हरविंदर कौर जुल्का, जसविंदर कौर, चांदनी भोजवानी,
सिम्मी सलूजा, हरजिंदर कौर, सरबजीत कौर, स्वर्ण कौर, कुलबीर कौर, रंजीत कौर, सिमरन कौर,नीतू ओबरोय सुरेंद्र कौर, हैप्पी कौर, सुमित कौर,ज्योति अरोड़ा, दीपा कालरा आदि।

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