अमावस्या पर गुरुद्वारे में आलौकिक कीर्तन दरबार, साहिबज़ादों की शहादत को किया नमन



 आगरा। अमावस्या के पावन अवसर पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी महाराज चरण छोह प्राप्त स्थान पर आलौकिक कीर्तन दरबार का आयोजन श्रद्धा और सत्कार के साथ हुआ धार्मिक आयोजन दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों की महान शहादत को समर्पित था।कीर्तन दरबार में श्री हेमकुंठ साहिब के हजूरी रागी जत्था भाई हरपाल सिंह मेहर एवं साथी तबलाकर गुरमीत सिंह  और बीबी अरूणगीता द्वारा गुरुवाणी का  भावपूर्ण कीर्तन प्रस्तुत किया। शब्द गुरुबाणी कीर्तन की दिव्य ध्वनियों से पूरा गुरुद्वारा परिसर “वाहेगुरु” के जयकारों से गूंज उठा स्त्री सत्संग और साध संगत ने भाव-विभोर होकर सुखमनी साहिब जी के पाठ किये साहिबज़ादों के त्याग, बलिदान और धर्म-रक्षा के संदेश को आत्मसात किया। शब्द:देह शिवा वर मोहे एह शुभ करमन ते कबहुँ ना टरु,,, साहिबज़ादों की शहादत से मिलने वाली प्रेरणा, सत्य, साहस और धर्म की रक्षा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया ज्ञानी विजय सिंह द्वारा अरदास हुकमनामा के उपरांत गुरु का अटूट लंगर भी संगत सभी श्रद्धालु प्रेमपूर्वक पाया सेवा मे रहे। गुरनाम सिंह अरोड़ा,जसप्रीत सिंह,गुरु सेवक श्याम भोजवानी,प्रवीन अरोड़ा, जसवीर सिंह, राजीव अरोड़ा,अमृत आहूजा, रिकी सलूजा, चरनपाल सिंह,समस्त प्रबंधक कमेटी

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