शहीद हेमू कलानी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा,सिंधी युवा मंच एवं सिंधी जनरल पंचायत ने हेमू कलानी को किया नमन




 देश सेवा के लिए बलिदान होने वाले हेमू कालाणी को देश हमेशा रखेगा याद*

*तहसील तिराहे पर स्थित हेमू कलानी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन*

आगरा ।  भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हेमू कलानी की गिनती उन अमर शहीदों में होती है जिन्होंने अपने बलिदान से युवाओं में देश की स्वाधीनता का बिगुल बजाया था। देश को फिरंगी सरकार की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने में अपने प्राणों की आहुति देने वाले युवा क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी का 83वां बलिदान दिवस पूर्व वर्षों की भांति सिंधी युवा मंच व पूज्य सिंधी जनरल पंचायत शाहगंज की ओर से शहीद की प्रतिमा स्थल तहसील चौराहे पर मनाया गया। इस अवसर पर शहीद हेमू कलानी को नमन करते हुए  योगी विश्वनाथ ने बताया कि शहीद हेमू कालानी ने देश की खातिर अल्प आयु में ही अपने प्राणों की आहुति दी ऐसे युवा क्रांतिकारी  के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। हेमू कलानी को 19 वर्ष की अल्पायु में 21 जनवरी 1943 में अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था देश की आजादी के लिए जीवन को न्योछावर करने वाले हेमू कलानी सिंधी समाज ही नहीं हर एक देशभक्त युवा के लिए क्रांति की मिसाल हैं। इस अवसर पर सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सोनी ने हेमू कलानी महान देश भक्त बताते हुए कहा उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता चिमन पैरवाणी व नरेश लखवानी ने संयुक्त रूप से की।  संचालन हरीश टहल्यानी द्वारा किया गया।  समाजसेवी और संस्था के संरक्षक हेमंत भोजवानी ने बताया कि शहीद हेमू कॉलानी की प्रतिमा वर्ष 1999 में संस्था के सहयोग से लगाई गई थी उससे पूर्व इस मार्ग का नाम भी शहीद हेमू कालानी के नाम से हुआ था। संस्था द्वारा विगत 35 वर्षों से शहीद हेमू कॉलानी का बलिदान दिवस 21 जनवरी व जन्मदिवस 23 मार्च को मनाया जाता है।

*ऐसे थे अमर शहीद हैमू कलानी*

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में शहीद हेमू कालानी की गिनती उन अमर शहीदों में होती है, जिन्होंने अपने बलिदान से युवाओं में देश की स्वाधीनता का बिगुल बजाया। उनका जन्म 23 मार्च 1923 को वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सख्खर में हुआ था। छात्र जीवन से ही उन्होंने सिंधी समाज के उदय और भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने स्वराज सेना का गठन कर अंग्रेजों को ललकारा। हथियारों से लदी अंग्रेजी की रेलगाड़ी को पटरी पर उतारने की कोशिश में उन्हें गिरफ्तार किया गया। महज 19 साल की उम्र में अंग्रेजों ने 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी दे दी।न

इनकी रही मौजूदगी*

इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मोहनलाल बोधवानी, श्याम भोजवानी, भोजराज लालवानी, कन्हैया सोनी   सुनील कर्मचंदानी, पार्षद राधा रानी, गोपाल चाहर , विजय भाटिया, मोहनलाल धर्मानी, नरेश हांडा, महेंद्र कुमार, सुरेश राजपाल , हर्ष ढालिया, उमेश पेरवानी मनोज नोतनानी , थावरदास, हीरालाल, नरेश डोडवानी, मनोहर लाल, इल्ली भाई, नरेंद्र करमचंदानी, कन्हैया पारवानी, सुंदरलाल चेतवानी, के लाल त्रिलोकानी, संजय नोतनानी, प्रकाश मंघवानी, मोहन सोनी  गुलशन, जितेंद्र पमनानी, लक्ष्मण कल्याणी, दीपक आहूजा, सनी ग्यामलानी, हीरालाल खूबचंदानी,  दौलतराम साधवानी, जीवतराम सुंदर भाई , नरेंद्र देवानी, हरीश लालवानी, ब्रह्मचंद गोस्वामी, आदि  गणमान्य मौजूद रहे। सभी ने शहीद हेमू कालानी के जीवन पर प्रकाश डाला कार्यक्रम उपरान्त शहीद की याद में फल का वितरण किये गए।


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