श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा में भगवान के बाल लीलाओं का वर्णन
आगरा।रंग महल बैंकट हॉल मारुती स्टेट चौराहा,बोदला रॉड आगरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस गुरूवार को कथा में भगवान के बाल लीलाओ का वर्णन करते हुए भागवताचार्य पं गरिमा किशोरी जी ने कहा कि भगवान को माखन इसलिए अच्छा लगता हैं क्यूकि माखन भक्त का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कथा में प्रवचन में समुन्द्र में कालीय नाग कि कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कालीय नाग बृज में रहता था कोई नदी में जाता तो उससे वह मार देता था।उन्होंने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया की 7 कोस लंबे चौड़े कालिकाल के देवता गोवर्धननाथ को 7 वर्ष के कन्हैया ने अपने सबसे छोटी उगली में 7 दिनरात अपनी अंगुली पर रखा। भगवान धारण किए रहे इंद्र देव का अभिमान तोड़ा। इस लिए जीव को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए और कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए,जिससे कर्म करोगे तो फल मिलेगा इसलिए भगवान ने भी कर्म को प्रधान बताते हुए कहा कर्म करना जीव का धर्म है फल देना मेरा काम है।श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा व्यास द्वारा बीच-बीच में सुनाए गए भजन पर श्रोता भाव विभोर हो गए।हरी नाम से ही जीव का कल्याण हो जाताकथा व्यास ने बताया कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में मानस पुण्य तो सिद्ध होते हैं। परंतु मानस पाप नहीं होते। कलयुग में हरी नाम से ही जीव का कल्याण हो जाता है। कलयुग में ईश्वर का नाम ही काफी है सच्चे हृदय से हरि नाम के सुमिरन मात्र से कल्याण संभव है।इसके लिए कठिन तपस्या और यज्ञ आदि करने की आवश्यकता नहीं है। जबकि सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में ऐसा नहीं था।इस दौरान कथा में परीक्षित नानक गंगा देवी मानवानी ,सुरेश मुदग़ल मोतीराम,समाजसेवी श्याम भोजवानी,केदार पचौरी,संजय गोयल, सोन कश्यप,जयकिशन वर्षा मंघरानी, विक्की जीवलानी, भूपेन्द्र पचौरी,मनोज तीर्थानी,विजय आसवानी, धमन पुरसानी, सुनील मालवानी, लखन,संजय दिव्यांश,हरीश ,कुंदनआदि मौजूद रहे
Jarnalist, Satish Mishra,Agra
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