बस एक ही तीरथ है हिंद में यात्रा के लिए,कटाए बाप ने बेटे जहाँ ख़ुदा के लिए




 आगरा।श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की महान शहादत को नमन करते हुए गुरुद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर/विभव नगर, आगरा में चल रहे लड़िवार गुरमत समागम  ‘सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह श्रद्धा एवं शौर्य भाव के साथ सम्पन्न हुआ, गुरु साहिब के अद्वितीय बलिदान और धर्म की रक्षा हेतु दिए गए सर्वोच्च त्याग को स्मरण करने के लिए समर्पित रहा।,आज के दीवान में पंथ के प्रसिद्ध कथाविचारक  भाई साहिब भाई बलदेव सिंह (मोहाली वालो) ने गुरमत विचारों के माध्यम से संगत को निहाल किया,उन्होंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा चमकौर की ऐतिहासिक जंग में धर्म और मानवता की रक्षा हेतु दिए गए महान बलिदान का विस्तार से वर्णन किया, कथा में गुरु साहिब की अडिग आस्था, साहस तथा सिख शहीदों की वीरता का भावपूर्ण स्मरण किया गया, जिसे सुनकर संगत भाव-विभोर हो उठी,भाई साहब जी ने कथावाचन के दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी के चमकौर की जंग में और सिख शहीदों की जीकर गुरमत विचारों द्वारा पंच प्यारे में से भाई हिम्मत सिंह, भाई मोकम सिंह, भाई साहब सिंह, भाई संगत सिंह को कलगी दी जाने की बात कथा विचारों से सांझा कर सिख शहीदों की शहादतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह संदेश दिया गया कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, तपस्या और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की अनुपम मिसाल है, एवं हजूरी रागी भाई हरजिंदर सिंह द्वारा अमोलक कीर्तन पवित्र रचना से संगत को निहाल किया।, यह शहीदी समागम श्रद्धा, बलिदान एवं राष्ट्रधर्म की भावना को सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने उपस्थित होकर गुरु साहिब की महान शहादत को नमन किया,गुरु की अरदास हुकुमनामा अपरान्त गुरु का लंगर पाकर गुरुओ का शुकराना किया मुख्य रूप से मौजूद रहे प्रधान हरपाल सिंह, राजू सलूजा, श्याम भोजवानी, मलकीत सिंह, गुरिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह लवली, हरजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह लाडी, मंशा सिंह, मनदीप सिंह, कृपाल सिंह, सनी सिंह आदि

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