श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस शुकदेव जन्म व राजा परीक्षित प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन


 आगरा,वीआईपी रोड, ख्वाजा सराय स्थित प्राचीन अखलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ, कथा स्थल पर “राधे-राधे” और “हरि नाम” के संकीर्तन से समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा,कथाव्यास पंडित कपिल देव शास्त्री (बाद वाले) ने द्वितीय दिवस की कथा में शुकदेव मुनि के जन्म प्रसंग तथा राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप की मार्मिक कथा का विस्तार से वर्णन किया, उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्ग है,शुकदेव मुनि का वैराग्य, ज्ञान और भक्ति मानव जीवन के लिए आदर्श है, वहीं राजा परीक्षित का प्रसंग यह संदेश देता है कि मृत्यु की स्मृति से ही जीवन सार्थक बनता है,कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य को अहंकार, लोभ और क्रोध का त्याग कर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में स्वयं को समर्पित करना चाहिए, भागवत कथा श्रवण से मन शुद्ध होता है और जीवन में सद्गुणों का विकास होता है, कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूबे नजर आए,कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया, आयोजन समिति ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक आयोजित की जा रही है,इस अवसर पर मुख्य रूप से परीक्षित केशव, कमलेश बघेल, समाजसेवी श्याम भोजवानी, मनोज नोत्तनानी,दिनेश ,राजबाला बघेल,कमलेश बघेल,शबरी,भावना कुशवाह,सरोज बघेल,सुमन बघेल,ग्रीशा बघेल, दिव्या,ललिता,दया रानी ,महिला मंडल समूह, पप्पू बघेल, पुनीत चंदानी, अजय बघेल, रोहित गुप्ता, प्रवेश, उत्तम बघेल, रवि बघेल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे,

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