माता शबरी की भक्ति और नवधा भक्ति के प्रसंग से भाव विभोर हुए श्रद्धालु,अधिक मास में संतों के सान्निध्य में कथा श्रवण को बताया जीवन का परम सौभाग्य


बाबा रंगूराम धाम, कैलाशपुरी आगरा में आयोजित दिव्य श्रीराम कथा महोत्सव के अष्टम दिवस धर्ममयी अयोध्या जैसा वातावरण देखने को मिला, श्रीधाम वृंदावन से पधारीं पूज्या पं. गरिमा किशोरी जी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीराम और माता शबरी के अनुपम प्रेम एवं भक्ति का भावपूर्ण वर्णन करते हुए नवधा भक्ति का महत्व बताया, कथा का रसपान कर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए और पूरा कथा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा,पूज्या कथाव्यास ने कहा कि माता शबरी की निष्काम भक्ति, अटूट विश्वास और प्रभु के प्रति समर्पण ने उन्हें भगवान श्रीराम का साक्षात सान्निध्य प्रदान किया, प्रभु बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल हृदय और सच्चे प्रेम को स्वीकार करते हैं, उन्होंने नवधा भक्ति का वर्णन करते हुए बताया कि संतों का संग, प्रभु कथा में प्रेम, गुरु सेवा, भगवान के गुणों का गान, मंत्र जाप, दृढ़ विश्वास, इन्द्रिय संयम, संतोष, सरलता और पूर्ण समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का सरल मार्ग है,इस अवसर पर स्वामी गुरमुख दास उदासीन ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि अधिक मास में संतों के सान्निध्य में भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य विरले लोगों को प्राप्त होता है, प्रभु की लीलाएँ अपरम्पार हैं और जो श्रद्धा एवं विश्वास के साथ उनका स्मरण करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है, दास दीपक उदासीन ने सभी से धर्म, सेवा, सत्संग और भक्ति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया,समाजसेवी राजेश लालवानी ने कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया मुख्य रूप से कौशल्या उदासीन,सिमरन लालवानी, पूनम छत्तानी, कीर्ति उदासीन,नीलम, राधा, कविता, जया,सौम्या, आकांशा,भाविका, सावित्री, रानू, अंजली,हर्षित, कान्हा, सागर,साहिल,पूजा, सिमरन, सान्या, गुनगुन, आयुषी,

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