भरत मिलाप और चित्रकूट प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
बाबा रंगूराम धाम, कैलाशपुरी में चल रहे दिव्य श्रीराम कथा महोत्सव के सप्तम दिवस श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला, श्रीधाम वृंदावन से पधारीं प्रख्यात कथावाचिका पं. गरिमा किशोरी जी ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीराम की पावन कथा का रसपान कराते हुए भरत मिलाप एवं चित्रकूट प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया,कथाव्यास ने कहा कि भरत और श्रीराम का मिलन भाईचारे, त्याग, समर्पण और मर्यादा का अद्वितीय उदाहरण है, चित्रकूट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और कर्तव्य का पालन ही मानव जीवन की सबसे बड़ी साधना है, कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर होकर प्रभु श्रीराम के जयकारों में डूब गए और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा,अयोध्या के आराध्य प्रभु श्रीराम के भक्त दूर दूर से बाबा रंगूराम धाम पहुंचे और कथा का अमृतपान कर अपने जीवन को धन्य बनाया, श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा श्रवण करते हुए प्रभु से सुख, शांति और लोककल्याण की कामना की,इस अवसर पर स्वामी गुरमुख दास उदासीन जी ने अपने संदेश में कहा कि, श्रीराम कथा मनुष्य को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है, प्रभु श्रीराम के चरित्र में सत्य, सेवा, त्याग और मर्यादा का संदेश समाहित है,यदि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है,कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम के चरणों में विश्व कल्याण की प्रार्थना की तथा आगामी दिवस की कथा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का संकल्प लिया,भरत मिलाप प्रसंग सुन नम हुई श्रद्धालुओं की आंखें
चित्रकूट प्रसंग ने भक्तों को किया भाव विभोर
बाबा रंगूराम धाम में गूंजे जय श्रीराम के उद्घोष
मुख्य रूप से सेवा मे रहे
स्वामी गुरमुख दास उदासीन, दीपक उदासीन,
राजेश लालवानी, हेमंत भोजवानी, श्याम भोजवानी,
भगवान अवतानी, नन्दलाल छतानी, संजय नोतनानी, हर्षित उदासीन,
कान्हा,सागर,



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