सुखमनी सुख अमृत प्रभ नाम भगत जना कै मन बिसराम
,(गुरु अर्जन देव जी का शहीदी पर्व बड़ी श्रद्धा व भावपूर्ण ढंग से मनाया गया) सिख धर्म के पांचवे गुरु अर्जन देव जी का पावन शहीदी पर्व गुरुद्वारा दशम पिता शाहगंज में बहुत ही श्रद्धा व भावना के साथ मनाया गया, सर्वप्रथम नितनेम बानी व सुखमनी साहिब जी का पाठ समूह संगत ने मिलकर किया उसके बाद गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी जनों द्वारा बानी का गायन किया गया, तत्पश्चात प्यारे वीर महेंद्र पाल सिंह जी ने अपनी मधुर रसना से अमृतमयी बाणी का गायन करके सभी का मन मोह लिया उन्होंने कहा की गुरु अर्जन देव पातशाह जी में इतनी ताकत थी इतना सामर्थ था कि अगर वह अपनी एक बांह भी उठा देते तो युग पलट सकता था आसमान फट सकता था उनके लिए तती तवी को ठंडा करना या अग्नि को शांत करना बहुत छोटी सी बात थी,लेकिन उन्होंने गुरु के भाणे में रहकर शहादत का जाम पी लिया ताकि सारा संसार उस प्रभु पिता के हुकम में रहते हुए अपना जीवन व्यतीत करे, वीर जी ने शब्द "जपयो जिन अर्जन देव गुरु, फिर संकट जोन गरब ना आयो" और साथ ही गुरु अर्जन देव जी द्वारा उच्चरित वाणी सुखमनी साहिब में से शब्द "आद गुरह नमह, जुगाद गुरह नमह" का गायन कर सारे माहौल को भक्तिमय बना दिया उन्होंने कहा की बाणी की यह खूबसूरती है कि हम बाणी का एक शब्द भी नहीं बदल सकते पर बाणी का एक शब्द हमारा पूरा जीवन बदल सकता है इसलिए कलयुग में गुरु जी द्वारा बानी रूपी जो अनमोल दात संसार को मिली है सभी को इससे जुड़कर रहना चाहिए, इस अवसर पर प्रधान बॉबी आनंद,गुरु सेवक श्याम भोजवानी, मोहन गंनवानी, गुरमीत सिंह, लव पोपली, अजय अरोड़ा, मनोज गिड़वानी, जगदीश करमचंदानी, संजय सेठ शंटीआनंद, आदि की उपस्थिति रही उसके बाद गुरु महाराज के अटूट लंगर व ठंडे मीठे जल का वितरण किया गया



Comments
Post a Comment