केंद्रीय बजट 2026-27 में उद्योग एवं व्यापार जगत को राहत प्रदान किए जाने के संबंध मे दिया ज्ञापन


 आगरा। देश का उद्योग एवं व्यापार वर्ग स्वतंत्रता के बाद से आज तक निरंतर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार सृजन करने तथा सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देला आ रहा है। वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई, ऊँची व्याज दरें, जटिल नियम-कानून एवं साइबर अपराध जैसी समस्याओं के कारण व्यापारी एवं उद्यमी वर्ग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में उद्‌द्योग एवं व्यापार के हित में निम्नलिखित प्रस्तावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर राहत प्रदान करने की कृपा करें-

1. उद्योग एवं व्यापार के लिए दिए जा रहे बैंक ऋर्णा की वर्तमान ऊँची ब्याज दरों में कटौती किए जाने का प्रस्ताव लागू किया जाए।

2. व्यापारी एवं उद्यमियों के ऋण खाते मात्र तीन माह की किस्त/ब्याज जमा न होने पर एनपीए घोषित कर दिए जाते हैं, जिससे चलता हुआ व्यापार एवं उद्योग बंद हो जाता है।अतः एनपीए घोषित करने की समय सीमा 3 माह से बढ़ाकर कम से कम 6 माह की जाए तथा एनपीए हो चुके खातों के लिए विशेष पुनर्स्थापना योजना लागू की जाए।

3. देशभर में अनेक औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियाँ आवासीय क्षेत्रों में विगत कई वर्षों से जीएसटी पंजीकरण, कमर्शियल विद्युत कनेक्शन एवं अन्य सभी वैधानिक लाइसेंस प्राप्त कर विधिवत रूप से संचालित हैं, इसके बावजूद नगर निगम, विकास प्राधिकरण एवं अन्य विभागों द्वारा उन्हें सील करने अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, जो अत्यंत अन्यायपूर्ण है।अतः ऐसी दमनात्मक एवं मनमानी कार्यवाहियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

4. जीएसटी के अंतर्गत वर्तमान में उपलब्ध दुर्घटना बीमा ₹10 लाख तक सीमित है, जिसे संशोधित करते हुए किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु की स्थिति में 10 लाख का बीमा लाभ पंजीकृत व्यापारी/उद्यमी को प्रदान किए जाने का प्रावधान किया जाए।

5. बढ़ते हुए साइबर अपराध को रोकने हेतु एक सशक्त, प्रभाती एवं व्यापारी हितैषी राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की जाए।

6. साइबर अपराध की स्थिति में यदि कोई अपराधी व्यापारी से खरीदारी कर भुगतान करता है तो संबंधित व्यापारी का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया जाता है, जबकि व्यापारी का इसमें कोई अपराध नहीं होता। अतः अपराधी के अतिरिक्त किसी निर्दोष व्यापारी का खाता फ्रीज न किया जाए, ऐसी स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए।

7. वृद्ध व्यापारियों के जीवन यापन हेतु न्यूनतम 140,000 प्रतिमाह पेंशन योजना लागू की जाए।

8. जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल कार्यों हेतु लैपटॉप एवं आवश्यक सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएँ।

9. जीएसटी में विलंब से भुगतान पर 18% ब्याज लिया जा रहा है, जिसे घटाकर अधिकतम 6% किया जाए।

10. जीएसटी अधिनियम में दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत जेल की सजा को समाप्त किया जाए तथा इसे केवल आर्थिक दंड तक सीमित किया जाए।

11. वाहन खरीदते समय एक और रोड टैक्स और दूसरी ओर पूरे देश में टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जो दोहरा कर है।अतः वाहन पंजीकरण पर लिया जाने वाला रोड टैक्स एवं व्यावसायिक वाहनों से वार्षिक रोड टैक्स समाप्त किया जाए।

12. वर्तमान में आयकर अधिनियम के अंतर्गत कंपनियों पर लगभग 25% की दर से आयकर लगाया जा रहा है, जबकि साझेदारी फर्मों पर 30% की उच्च दर से आयकर देय है। जबकि वास्तविकता यह है। अतः छोटे एवं मध्यम व्यापारियों की पोत्साहन देने तथा उन्हें औद्योगिक विकास की मु जोडने हेतु साझेदारी फर्मों पर आयकर की दर घटाकर अधिकतम 20% किया जाना अत्यंत आक है।

13. केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में 12% एवं 28% की स्लैव समाप्त किए जाने के पश्चात व्यापारीद्वारा पूर्व में 12% एवं 28% जीएसटी पर खरीदे गए माल को वर्तमान में 18% अथवा 51% की दर से बेचना पड़ रहा है, जिससे व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।इस कारण व्यापारियों का लगभग 7% से 10% तक का इनपुट टैक्स क्रेडिट विभाग के पोर्टल पर संबित पड़ा हुआ है, जो उनकी कार्यशील पूंजी को बाधित कर रहा है।अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि उक्त लंबित आईटीसी राशि को बिना किसी विलंब के संबंधित व्यापारियों के बैंक खातों में तत्काल रिफंडांट्रांसफर करने की व्यवस्था लागू की जाए,अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि उद्योग एवं व्यापार हित में इन प्रस्तावों को सहानुभूतिपूर्वक स्वीकार कर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करे ।

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