शिव महापुराण कथा के चौथे दिन सुनाया सती चरित्र, शिव-सती विवाह की कथा से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
आगरा, प्रतापपुरा स्थित पं. रतिराम शिव एवं दुर्गा मंदिर में श्रावण माह के पावन अवसर पर चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा, कथा व्यास श्रद्धेय पं. लोकेश कृष्ण शास्त्री जी ने भगवान शिव एवं माता सती के पावन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को शिव-सती विवाह और माता सती के देह त्याग की कथा सुनाई,कथा व्यास ने बताया कि नारद जी के पूछने पर ब्रह्मा जी ने भगवान शिव और माता सती के विवाह का प्रसंग सुनाया, उन्होंने बताया कि किस प्रकार माता सती और भगवान शिव का दिव्य विवाह संपन्न हुआ तथा इसके बाद दक्ष प्रजापति के यज्ञ में हुए प्रसंग के कारण माता सती ने अपने देह को अग्नि को समर्पित कर दिया,कथा के प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा कथा पंडाल हर-हर महादेव और जय माता दी के जयघोष से गूंज उठा,पं. लोकेश कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि भगवान शिव का चरित्र हमें त्याग, तपस्या, समर्पण और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, शिव महापुराण का श्रवण मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है और भगवान के प्रति श्रद्धा को और अधिक दृढ़ करता है,इस अवसर पर मंदिर महंत पं. तुहिराम, संतोष शास्त्री, समाजसेवी श्याम भोजवानी,चेतन अरोड़ा, बिरज मोहन अरोड़ा,तनय अग्रवाल, राजेश कुमार शर्मा, राहुल मुदगल, अरुण पचौरी, सौरव अग्रवाल, राजेन्द्र अग्रवाल, गुड्डू, हेमू, मुरारीलाल, शिवम, आर्यन, पीयूष, प्रशांत, कल्पना, लक्ष्मी, वंदना, सुनीता, छवि, यसी, आकृति, वमिका, हिरदया एवं कुंजिका सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे,
Jarnalist Satish Mishra Agra


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