पंकज गाँधी (एडिशनल कमीशनर ग्रेट 1) , जी.एस.टी विभाग को व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन*


*जी.एस.टी. में व्यापारियों व उद्योगों की कठिनाईयों के सम्बन्ध में मांग पत्र*

आगरा। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश इस मांग पत्र के माध्यम से प्रदेश के उद्योगों, व्यापारियों की जी.एस.टी.से सम्बन्धित समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता है। जी.एस.टी. विभाग के अधिकारी कानून को मनमर्जी से तोड़ मरोड कर व्यापारियों के उत्पीडन में लगे हुए हैं। भरपूर राजस्व एकत्र करने के बाद भी नित नये तरीकों से व्यापारियों का उत्पीडन किया जा रहा है।

 महानगर अध्यक्ष नरेश पाण्डेय ने कहा कि-

1. सचल दस्तो के द्वारा पूरा टैक्स जमा होने के बाद भी तकनीकी आधार पर (मानवीय भूलों) अनावश्यक कमियां निकालकर जुर्माना जमा कराया जा रहा है, जिसकी आड़ में भारी भ्रष्टाचार पनप रहा है। सचल दस्तो का काम कर अपवंचना को रोकना है। जहॉ पूरा कर जमा है तकनीकी कमी अथवा मानवीय भूलों के आधार पर गाड़ी रोककर जुर्माना लगाये जाने पर रोक लगायी जाये।

2. जी.एस.टी. अधिनियम में 40 लाख रूपये तक का व्यापार करने वाले व्यापारियों को रजिस्टेªशन से छूट प्राप्त है, परन्तु विभागीय अधिकारी टारगेट पूरा करने के लिए कम टर्नओवर वाले व्यापारियों का भी उत्पीड़न कर रजिस्टेशन प्राप्त करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। 40 लाख से कम कारोबार करने वाले व्यापारियों के जी.एस.टी. रजिस्टेशन के लिए बाध्य करने पर रोक लगायी जाये।

3. एस.आई.बी. जॉच व सर्वे के समय व्यापारी को भारी धनराशि कर के रूप में जमा करने के लिए बाध्य किया जाता है। जॉच का निर्णय पूर्ण होने से पहले किसी प्रकार का कर जमा कराया जाना गलत है, जिसके लिए मा0 उच्च न्यायालय व मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा भी समय-समय पर आदेश पारित किये गये हैं, परन्तु जी.एस.टी. अधिकारियों द्वारा जॉच व सर्वे के समय दवाब बनाकर कर के रूप में धन जमा कराना पूर्णतयः गलत है। जॉच के समय किसी भी प्रकार के कर के रूप में धन जमा कराये जाने पर रोक लगाये जाने की कृपा करें।

4. जी.एस.टी. के अन्तर्गत वर्तमान में उपलब्ध दुर्घटना बीमा रू0 10.00 लाख तक सीमित है, जिसे संशोधित करते हुए किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु की स्थिति में रू0 10 लाख का बीमा का लाभ पंजीकृत व्यापारी/उद्यमी को प्रदान किये जाने का प्राविधान किया जाये। 

महानगर कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया ने जोर देकर कहा कि--

5. जी.एस.टी. में पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल कार्य हेतु लैपटॉप/सॉफ्टवेयर निशुल्क उपलब्ध कराये जायें। 

6. जी.एस.टी. में विलम्ब से भुगतान पर 18 प्रतिशत ब्याज लिया जा रहा है, जिसे घटाकर अधिकतक 6 प्रतिशत किया जाये। 

7. जी.एस.टी. अधिनियम में दण्डात्मक प्राविधानों के अन्तर्गत जेल की सजा को समाप्त किया जाये तथा इसे केवल आर्थिक दण्ड तक सीमित किया जाये। 

8. तम्बाकू व्यापारियों की जी.एस.टी. से संबंधित एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि तम्बाकू पर जी.एस.टी. 40 प्रतिशत है एवं तम्बाकू पत्ते पर जी.एस.टी. 5 प्रतिशत है। इस बड़े अंतर की वजह से यहां का व्यापार समाप्त होता जा रहा है बाहर का व्यापारी 5 प्रतिशत पर तम्बाकू पत्ता ले जा रहा है और अपने यहां पर माल तैयार करता है इस वजह से इस उद्योग एवं सरकारी राजस्व को बहुत नुक़सान हो रहा है। अतः आपसे अनुरोध है कि तैयार तम्बाकू व तम्बाकू पत्ते की जी.एस.टी. दरों की विषमता को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, जिससे व्यापारी उत्पीडन व भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। 

9. अनेकों वस्तुओं पर कच्चे माल पर जी.एस.टी. की दरें 18 प्रतिशत व तैयार माल पर जी.एस.टी. की दरें 5 प्रतिशत है, जिससे निर्माता का अधिकांश पैसा जी.एस.टी. विभाग में फंस जाता है तथा वापिसी लेने के लिए वकील व विभाग के चक्कर लगाने पडते हैं। उपरोक्त राशि पर व्यापारी को कोई ब्याज भी देय नहीं है। 

उदाहरण: कागज पर जी.एस.टी. 18 प्रतिशत है तथा कागज से तैयार कार्डबोर्ड बॉक्स पर जी.एस.टी. 5 प्रतिशत है, जिसका 13 प्रतिशत अधिक दिया गया जी.एस.टी. के अन्तर को रिर्टन भरने के बाद स्वतः व्यापारी के खाते में स्थानान्तरित किया जाये। देरी होने की दशा में 18 प्रतिशत ब्याज दिया जाये। 

10. लम्बी दूरी के सामान को ट्रॉसपोर्टर द्वारा नजदीकी प्रमुख शहरों पर भेजकर दूसरे ट्रक में ट्रॉसफर किया जाता है, जिसमें कई दिन का समय लग जाता है तथा ट्रक नम्बर बदलने के कारण ट्रॉसपोर्टर ई.वे. बिल-2 जनरेट करता है, देरी होने के कारण विभाग द्वारा व्यापारी के माल को डबल सेल मानकर कर आरोपित किया जा रहा है, जिसमें व्यापारी का कोई दोष नहीं है। ट्रॉसपोर्टर द्वारा ई.वे. बिल-2 जनरेट किये जाने की दशा में विभाग द्वारा व्यापारी के माल की डबल सेल माने जाने पर रोक लगाई जाए। 

11. जी.एस.टी. रिफंड रिटर्न फाइल होने के बाद स्वतः जनरेट कर इनकम टैक्स की भांति व्यापारी के खाते में भेजे जाएं, देरी होने पर 18 प्रतिशत का ब्याज दिया जाये।

12. तैयार माल पर लगाए गए जी.एस.टी. की तुलना में पैकिंग मैटेरियल पर जी.एस.टी. की दरें अधिक होने के बाद भी आई.टी.सी. का लाभ व्यापारी को प्राप्त नहीं हो पा रहा है। रिटर्न फाइल होने पर अन्तर का भुगतान व्यापारी के खाते स्थानान्तरित कराये जायें। ज्ञापन देने वालों में महानगर अध्यक्ष नरेश पाण्डेय, महानगर कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया,अरुण गुप्ता, कपूर चंद रावत, संजय गुप्ता, जयदीप सोनकर, रामकुमार अग्रवाल, संतोष गुप्ता, उस्मान अगाई, पंकज अग्रवाल,, रियासत अली, प्रिंस जैन, हाजी कदीर खान, पंकज मिश्रा, राकेश कश्यप,विकास शल्या,अफरोज सैफी, किशोर वर्मा, अख्तर खान, बाबर खान, मोहम्मद सगीर, मोहम्मद इरफान, सोनू पंडित आदि व्यापारी उपस्थित रहे ल



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