महिमा साधु संग की सुनहो मेरे मीता।। (संत बाबा केहर सिंह जी की बरसी धूमधाम से संपन्न)
गुरुद्वारा बालूगंज में महापुरुषों की बरसी का आयोजन बहुत ही श्रद्धा व धूमधाम से किया गया सर्वप्रथम पावन बानी रेहरास साहिब के पाठ हुए उपरांत गुरुद्वारा के हजूरी रागी भाई सुरजीत सिंह ने अमृतवाणी का गायन किया तत्पश्चात प्यारे वीर महेंद्र पाल सिंह जी ने अपनी मधुर व रसमई शैली में अमृतमई कीर्तन की वर्षा की उन्होंने "महिमा साधु संग की सुनहो मेरे मीता" शब्द का बहुत ही सुंदर ढंग से गायन किया उसके पश्चात "ए वापार विरला वापारे" शब्द का गायन कर सभी को भक्ति रस में डुबो दिया उन्होंने कहा जैसे राजनीति की दुनिया में सबसे ऊंचा व प्रतिष्ठित पद राष्ट्रपति का होता है ऐसे ही धार्मिक दुनिया में सबसे ऊंचा व प्रतिष्ठित पद संत महापुरुषों का होता है आम इंसान अपना स्वभाव छुपाता है और प्रभाव दिखाता है जबकि संत जन अपना प्रभाव छुपाते हैं व अपना स्वभाव दिखाते हैं इसलिए महापुरुषों को हमेशा नमन करना चाहिए वह उनके द्वारा बताएं सच के मार्ग का अनुसरण हर व्यक्ति को करना चाहिए उन्होंने कहा गुरु ग्रंथ साहिब में जहां गुरुओं की बानी दर्ज है वहां गुरु महाराज ने भक्तजनों की व संत जनों और गुरु के प्यारे सिखों की वाणी को भी गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान दिया है। संगत से खचाखच भरे हाल में सभी संगत ने एक रस होकर अमृतमई गुरबाणी का आनंद लिया। कार्यक्रम के समापन पर समूह संगत ने एक साथ बैठकर गुरु महाराज का लंगर ग्रहण किया इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रमुख मनमोहन सिंह सरदार परमजीत सिंह मक्कर ने सभी संगत का धन्यवाद किया इस अवसर पर गुरु सेवक श्याम भोजवानी,गुरमीत सिंह सेठी,इन्दरजीत सिंह गुजराल,मिठठू वीर,अजीत सिंह,सनी पुरी,बलजीत सिंह,संजय सेठ,अमरजीत सिंह सेठी, यशपाल सिंह,अवतार सिंह, सरबजीत सिंह, आदि



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